कछुआ आ हरियर तोता

बहुत पहिने एकटा हरियर-हरियर वन छल। ओहि वन में एकटा कछुआ आ एकटा तोता मित्र बनि कए रहैत छल।

कछुआ बहुत धीर-गंभीर आ समझदार छल। ओ धीरे-धीरे चलैत, मुदा हर काज सोचि-समझि कए करैत। तोता बहुत चंचल छल। ओ फुरती सँ उड़ैत, बोलैत, आ सभ किछु जल्दी-जल्दी करैत छल।

एक दिन तोता कछुआ सँ कहल—
“मित्र! अहाँ एतेक धीरे किएक चलैत छी? जीवन त तेजी सँ जिएल जाएत अछि!”

कछुआ मुस्कराइ कए उत्तर देलक—
“मित्र, धीरे चलबाक मतलब ई नहि जे हम कमजोर छी। धीरज सँ चलल जाए, त मंजिल जरूर भेटैत अछि।”

तोता हँसि पड़ल आ उड़ि गेल।

ओहि दिन संझा में जोरदार आँधी आ बरखा आयल। तोता एकटा ऊँच गाछ पर छल, मुदा तेज हवा में ओ अपन संतुलन खो बैसल। डराइ कए ओ चिचियायल।

कछुआ अपन खोल सँ बाहर निकलल आ तोता केँ शांत कए कहल—
“डरू नहि मित्र, नीचाँ उतरू। हम अहाँ के सहारा देब।”

तोता धीरे-धीरे उतरि आयल। कछुआ अपन मजबूत खोल सँ तोता केँ बरखा सँ बचौलक। किछु देर बाद आँधी रुकि गेल।

तोता लाजे सँ कहल—
“मित्र कछुआ, आज अहाँ हमरा सिखेलहुँ जे धीरज आ समझदारी सबसे पैघ शक्ति अछि।”

कछुआ मुस्कराइ कए बजल—
“तेजी जरूरी अछि, मुदा धीरज बिना तेजी बेकार अछि।”

नीति:
👉 धीरज आ समझदारी सँ हर कठिनाई जीतल जा सकैत अछि।

Comments

One response to “कछुआ आ हरियर तोता”

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